Skip to main content

पढाई, दवाई और कमाई के लिए पलायन करते हैं पुरबियाॅ माटी के लोग-

 पढाई, दवाई और कमाई के लिए पलायन करते हैं पुरबियाॅ माटी के लोग-



विगत दिनों कविता पूर्ण शैली में भाषण देते हुए सीमांचल की एक जनसभा में तेजस्वी यादव ने कहा कि- बिहार के लोगों को पढ़ाई, कमाई और दवाई के लिए बाहर जाना पड़ता है । हम ऐसी नीतियां बनाएंगे जिसमें पढ़ाई कमाई और दवाई के लिए किसी भी बिहारी को बाहर नहीं जाना पड़ेगा । तेजस्वी यादव का यह वादा और भाषण हर बार की तरह चुनावी मंचों से उछाला गया जनता को छलावा देने का कोरा नारा होगा या  जमीन पर खरा उतरेगा, यह भविष्य में देखने का विषय है ।परन्तु वादे रूप में उठाया गया यह बुनियादी और गम्भीर विषय बिहार और पूर्वांचल के बुद्धिजीवियों, राजनीतिक ,आर्थिक विश्लेषको और स्वाभिमानी चरित्र के राजनीतिज्ञों के लिए चिंतन-मनन और गहराई से आत्म-विश्लेषण करने का विषय जरूर बन गया है। जब डार्विन अपने देश के लोगों को समझा रहा था कि- हम बन्दर की औलाद है उससे हजार साल पहले चाणक्य और चन्द्रगुप्त के बिहार में नालंदा,बोधगया, विक्रमशिला जैसी ज्ञान की एक दर्जन महान ध्वजपताकाऐ फहरा रही थी और जिसकी गूंज और गंध पूरी दुनिया में फैली हुई थी । इस देश के कोने-कोने से एवं दुनिया के तमाम देशो से लोग अपनी ज्ञान पिपासा को शांत करने के लिए इन विश्वविद्यालयों में अध्ययन हेतु आते रहते थे । ह्वेनसांग और फाह्यान जैसे अनगिनत उदाहरण इतिहास केपन्नों में खोजने खंघालने पर हमें मिल जाएगे । जो  पवित्र पावन भूमि ॠषभदेव से लेकर महावीर स्वामी जैसे चौबीस तीर्थंकरो और सत्य अहिंसा करूणा दया परोपकार की साक्षात प्रतिमूर्ति महात्मा बुद्ध जैसे सर्वश्रेष्ठ बौद्धिक आध्यात्मिक और दार्शनिक चेतना से परिपूर्ण व्यक्तित्वो की सृजनात्मक रचनात्मक और मानवतावादी चिंतनधारा और ज्ञान गंगा से निरन्तर अभिसिंचींत होती रही और आज भी पूरा विश्व इन महापुरुषों के दिव्य ज्ञान और दर्शन से दिव्यालोकित हो रहा है  आज उसी बिहार का नौजवान बेहतर जिन्दगी की आस में  बेहतर शिक्षा के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे देश के अन्य शिक्षण प्रशिक्षण संस्थानो में  पढ़ाई-लिखाई के लिए दर-दर भटकता रहता हैं । यह गहन अध्ययन और चिंतन का विषय है कि- जिस धरती पर पूरी दुनिया से अपनी ज्ञान क्षुधा तृप्त करने के लिए लोग आते रहते थे आज उसी माटी के लोग शिक्षा ग्रहण करने के लिए देश के दूसरे राज्यों के शिक्षण संस्थानों में मे भटक रहे हैं। मेरा स्पष्ट अभिमत है कि- देश के सर्वोच्च नीति नियंताओं की नियत में खोंट ,दूरदर्शितापूर्ण नीतियों के अभाव और शिक्षा के ईमानदारी से  विकेंद्रीकरण न करने के कारण इस तरह जलालत और जहालत भरी परिस्थितियाॅ उत्पन्न हूई । देश के हर नागरिक को दुनिया की सबसे बेहतर गुणवत्तापरक और आधुनिक शिक्षा उसकी भाषायी परिसीमा, जनपदीय चौहद्दी,आंचलिक आंगन और क्षेत्रीय चहारदीवारी के भीतर प्राप्त होनी चाहिए । देश के सर्वोच्च नीति नियंताओं की शिक्षा के प्रति उदासीनता कामचलाऊ नजरिया और ईमानदारी से  शिक्षा का विकेंद्रीकरण न कर पाने के कारण पूरे पूर्वांचल और बिहार में शिक्षा के लिए छात्रों और  नौजवानों में यह भटकाव देखने को मिलता है । आज पूर्वांचल और बिहार के लोगों को उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के लिए अपने घर से  हजारों मील दूर जाना पड़ता है । इस देश का बेहतर भविष्य चाहने वाले नेताओं को बेहतर शिक्षा केन्द्रों के विस्तार और विकेंद्रीकरण पर सारी  संकीर्णताओं का परित्याग कर गम्भीरता से विचार करना चाहिए। इस दिशा में स्वर्गीय राजीव गाँधी द्वारा देश के हर जनपद में नवोदय विद्यालय स्थापित करने की पहल शिक्षा के विकेन्द्रीकरण की तरफ ठोस और सकारात्मक और क्रांतिकारी कदम था । इसी तर्ज पर पढने वाले विद्यार्थियो की संख्या को ध्यान में रखकर  पूर्वांचल और बिहार में भारतीय उच्च शिक्षा के शिक्षण संस्थानों,भारतीय  प्रौद्यौगिकी संस्थान ( I I T) और भारतीय प्रबन्धन संस्थान ( I I M )  पर्याप्त मात्रा में स्थापित करने चाहिए । यहाँ यह भी ध्यातव्य है कि- देश- सेवा समाज- सेवा और जन-सेवा   का हवाला देकर राजनीति करने वाले  राजनीतिक सूरमा अपनी औलादो को इंग्लैंड आस्ट्रेलिया जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में पढने के लिए  भेजकर इस देश की महान ज्ञान परम्परा का अपमान और साथ ही  साथ समानता जैसे पवित्र संवैधानिक मूल्यों का अपमान करते हैं।  

जिन पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा देश के विकास के लिए शानदार विकास की योजनाएं परियोजनाएं बनाई और चलाई गई और यह सत्य है कि इन  विकास योजनाओं द्वारा देश ने विकास के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किये परन्तु यह समग्र और संतुलित नहीं रहा । देश के नीति निर्माताओं द्वारा हर बार पंचवर्षीय योजनाओं की उद्घोषणाओं में यह  बार-बार यह उल्लेख किया जाता रहा  कि  देश का समग्र सर्वांगीण और संतुलित विकास शासन सत्ता का संकल्प है । पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा शानदार विकास हुआ लेकिन वह क्षेत्रीय असंतुलन का शिकार हो गया और। आज इस देश के कुछ राज्य बहुआयामी  विकास की रफ्तार पकड़ चुके हैं तो कुछ राज्य बीमारू राज्यों की श्रेणी में आ गयग हैं । पंचवर्षीय योजनाओं और दिल्ली के हुक्मरानों द्वारा ढोल नगाड़े जरूर बजाए गए कि हम देश का समग्र और संतुलित विकास के प्रति प्रतिबद्ध है। परंतु प्रत्येक सरकारों द्वारा  बिहार और पूर्वांचल की पूरी तरह उपेक्षा हूई । कारगर पारदर्शी आर्थिक नीतियों के अभाव और दिल्ली की सरकारों के सौतेलेपन के कारण पूर्वांचल और बिहार का औद्योगिकरण नहीं हो पाया । उद्योग धंधों के पर्याप्त मात्रा में विकास न होने के कारण बिहार और पूर्वांचल के लोगों को रोजी रोजगार की तलाश में देश के बड़े शहरों महानगरों में जाना पड़ता है। वहां मेहनत मजदूरी जरूर करते हैं महानगरों को अपने परिश्रम पौरूष और पसीने से सजाते संवारते है।फिर भी वहां के स्थानीय निवासियों द्वारा कभी- कभी अपमानित भी किए जाते है । पूर्वांचल और बिहार के छात्रों नौजवानों मे अद्वितीय उर्जा और उत्साह है और प्रतिभा, कुशाग्रता ,कुशलता परिश्रम, पराक्रम और पुरुषार्थ भी कूट कूट कर भरा हुआ है परन्तु दूरदर्शीतापूर्ण  नीतियों और स्पष्ट रोड मैप के अभाव के कारण पूरा पूर्वांचल और बिहार आज भी आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक पिछड़ेपन का शिकार हैं। आजादी के बाद से अबतक पूरब से उगने वाले विकास के हर सूरज का आज भी हर रोज इंतजार पूर्वांचल और बिहार की माटी कर रही हैं और इस माटी का हर नौजवान उस सुनहरी भोर का इंतजार कर रहा है जिस भोर से भावी पीढ़ी को देश दुनिया में सैर सपाटे के लिए तो जाना पडे पर कम से कम पढाई कमाई और दवाई के अपना परिवार अपना प्रदेश कभी भी किसी भी परिस्थिति में न छोड़ना पडे। 


मनोज कुमार सिंह प्रवक्ता बापू स्मारक इंटर कॉलेज दरगाह मऊ।

Comments

Popular posts from this blog

आधुनिक भारत में लोकतंत्र के संस्थापक एवं पथ प्रदर्शक थे नेहरू ‐- संतोष प्रताप सिंह लोक सभा बलिया के भावी उम्मीदवार ने किया समर्थन

 27 मई 1964 - पुण्य स्मृति  आधुनिक भारत में लोकतंत्र के संस्थापक एवं पथ प्रदर्शक थे नेहरू ‐-    मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण की भाषा में जवाहरलाल नेहरू पूर्णतः अपने पिता के पुत्र थे, जबकि- गांधी जी अपनी माता की संतान थे। जवाहर लाल नेहरू ने अपने पिता मोतीलाल नेहरू से स्वतंत्रता, साहस की भावना, जोखिम उठाने की क्षमता, दृढ़ इच्छाशक्ति, अविचल संकल्प और अभिजात्य संस्कार विरासत में पाया था। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने गए जवाहरलाल नेहरू ने लगभग सात वर्ष इंग्लैड में व्यतीत किया। इस दौरान वह ब्रिटेन में प्रचलित मानववादी उदारवाद की परम्पराओं की तरफ आकर्षित हुए और इन परम्पराओं को हृदयंगम कर लिया। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के सुविख्यात शिक्षक और सुप्रसिद्ध राजनीतिक विचारक हेराल्ड लाॅस्की के प्रिय शिष्यों में रहे जवाहरलाल नेहरू जार्ज बर्नार्ड शॉ और बर्ट्रेण्ड रसल के विचारों से बहुत प्रभावित थे। विश्व, ब्रहमांड और समाज को समझने- परखने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने वाले जवाहरलाल नेहरू जैसे-जैसे भारतीय स्वाधीनता संग्राम में मुखर होते गए वैसे- वैसे उनकी स्वतंत्रता...

बलिया। हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन एवं उनके 72 साथियों की शहादत के याद में 25सफर रविवार को निकाला गया शिया मस्जिद से जुलूस

 बलिया।  हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन एवं उनके 72 साथियों की  शहादत के याद में 25सफर रविवार  को अंजुमन हाशमीमियां विशुनीपुर के तत्वावधान में 41 वां जुलूसे चेहल्लुम स्व.मुनीर हसन जैदी के प्राचीन इमाम बारगाह से शिया समुदाय के लोगों  द्वारा निकाला गया। इसके पूर्व इमाम बारगाह में मजलिसे अज़ा को सम्बोधित करते हुए अल्लामा आज़ीम जौरासी ने कहा कि हर वर्ष अरबयीन (इमाम हुसैन के चेहल्लुम) में शामिल होने वाले लोगों केवल हुसैनी समाज के ही लोग शहीदाने कर्बला के प्रति दुख व्यक्त करने के लिए कर्बला नहीं पहुंचे थे, बल्कि हर समाज हर बिरादरी के लोग पहुचते है।जो इस बात को दर्शाता है कि इमाम हुसैन का पैगामे इन्सानियत  हर जाति धर्म के लोगों में अपनी जगह बना चुका है। उन्होंने कहा कि हमें जुल्म का  नहीं बल्कि मजलूम के साथ हमेशा खड़ा रहना चाहिए। वाकेयाते कर्बला त्याग, बलिदान और अंहिसा की सीख देता है। उनके इस मैसेज को पूरी दुनिया में आपसी भाईचारे और जज्बे को फैलाना है।हम हुसैनी है तो हमारी पहचान भी इमाम के रास्ते पर चलते रहना और पैगंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद के दीन...

Nandlal Gupta sucide case old now all accused are free now family of nandlal is forgotten

 One month back the online Facebook live sucide case of nandlal Gupta was the topic of discussion,  many senior leader of many parties came fight against the accused and supported nandlal Gupta family even akhilesh yadav also had visited the house of nandlal Gupta  But few month latter the case is in court many criminals and accused got bail from court and people also forgot as usual.