कार्ल मार्क्स की 205वीं जयंती ( 5 मई ) के अवसर पर- लुटेरी व्यवस्था को बदलने का सबसे प्रहारक औज़ार है मार्क्सवाद डा॰ गिरीश · “जैसे हम कम्युनिस्ट पार्टियों की आलोचना करते हैं, अब सत्ता में नहीं हैं वो, कहीं नजर नहीं आते, एक केरल में कोने में बैठे हैं, फिर भी वो विचारधारा खतरनाक है।“- श्री मोदी। एक विशद लोकतान्त्रिक देश में, लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से चुन कर आये, सत्ता शिखर पर विराजमान व्यक्ति द्वारा आज़ादी के बाद पहली बार कम्युनिस्टों और उनके सिध्दांत के बारे में इस तरह के विचार व्यक्त किए गये हैं तो यह स्वतः गंभीर विचार का विषय बन जाता है। यह उपर्युक्त कथन के वक्ता की नीयत और इरादों पर भी सवाल खड़े करता है। हां ! हमारी विचारधारा खतरनाक है क्योंकि एकमात्र वही सिध्दांत है जिसके मानने वालों ने आपके द्वारा ओढ़े गए धर्म- संस्क्रति और आस्था के चोगे को उघाड़ कर देश दुनियाँ और जनता के सामने ला दिया कि आप सिर्फ और सिर्फ शोषक पूंजीवाद, जो आज कारपोरेट राज बन चुका है, उसके दुमछल्ले मात्र हैं। और अपने इस कुरूप पर पर्दा डालने को ही आपने यह धर्म- संप्रदाय- जाति क...
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